ख़ेरमालिया। सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं को संजोते हुए, समाज के लिए एक अत्यंत मंगलकारी और हर्ष का विषय सामने आया है। आगामी दिनों में श्री सीताराम, लक्ष्मण एवं साम्बशिवादि (भगवान शिव परिवार) की मूर्तियों की 'प्राण प्रतिष्ठा' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा के नए संचार का केंद्र भी बनेगा।
विद्वान आचार्य का सानिध्य
इस महोत्सव की सबसे विशेष बात यह है कि इसका आयोजन याज्ञिक शिरोमणि, श्री राम जन्मभूमि (अयोध्या) शिला पूजनाचार्य और प्रख्यात वेदाद्याचार्य पंडित प्रवर श्री गंगाधर जी पाठक मैथिल के पावन आचार्यत्व में संपन्न किया जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के शुरुआती अनुष्ठानों से जुड़े रहे आचार्य पाठक के मार्गदर्शन में होने वाला यह कार्यक्रम शास्त्रोक्त विधि-विधान और शुद्धता की दृष्टि से अद्वितीय होगा।
पांच दिवसीय अनुष्ठान का पूरा विवरण
यह उत्सव 25 अप्रैल से शुरू होकर 29 अप्रैल तक पांच दिनों तक चलेगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है-
25 अप्रैल (शनिवार, जानकी नवमी) को शोभा कलश यात्रा के साथ उत्सव का शुभारंभ होगा। इस दिन पंचगव्यपान, दशविध स्नान और मंडप निर्माण जैसे प्रारंभिक कार्य किए जाएंगे।
26 अप्रैल (रविवार) को पंचांग पूजन और मंडप पूजन के साथ मूर्तियों का जलाधिवास और अग्नि स्थापन किया जाएगा।
27 अप्रैल (सोमवार) को पूजन और हवन के साथ अन्नाधिवास की प्रक्रिया जारी रहेगी।
28 अप्रैल (मंगलवार) यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें मूर्तियों का नगर भ्रमण, शिखर कलश स्थापन और मंदिर की भव्य सजावट की जाएगी। शाम को शय्याधिवास और महामहोत्सव की तैयारी होगी।
29 अप्रैल (बुधवार, वैशाख शुक्ल त्रयोदशी) को यह मुख्य दिवस है। सुबह 3:00 बजे से मूर्तियों के स्थिरीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। सुबह 8:30 बजे मुख्य 'प्राण प्रतिष्ठा' संपन्न की जाएगी।
प्रथम दर्शन और महाप्रसादी
श्रद्धालुओं के लिए सबसे प्रतीक्षित क्षण सुबह 10:35 बजे आएगा, जब मूर्तियों के प्रथम दर्शन सुलभ होंगे। इसके पश्चात कीर्तन, पूर्णाहुति और ब्राह्मण भोज का आयोजन होगा। आयोजन समिति ने भक्तों के लिए दोपहर 1:00 बजे से 'महाप्रसादी' (भंडारे) की व्यवस्था की है।
इस पावन अवसर पर समस्त धर्मप्रेमियों को सपरिवार आमंत्रित किया गया है ताकि वे इस दिव्य अनुष्ठान का हिस्सा बनकर धर्म लाभ उठा सकें। यह कार्यक्रम भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के भव्य प्रदर्शन का प्रतीक बनने जा रहा है।