मन्दसौर। जिले के नाहरगढ़ क्षेत्र में पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक शख्स खुद को पत्रकार बताकर न केवल लोगों की छवि धूमिल कर रहा है, बल्कि डरा-धमकाकर अवैध वसूली (उगाही) पर उतर आया है। ताजा मामला ग्राम जग्गाखेड़ी के एक जागरूक नागरिक और ग्राम रक्षा समिति (VDS) के सदस्य अनिल पिता देवीलाल दमामी से जुड़ा है, जिन्हें झूठी खबरें फैलाने के नाम पर खुलेआम ब्लैकमेल किया जा रहा है।
भक्ति के मार्ग में 'भ्रष्ट' बाधा
शिकायतकर्ता अनिल दमामी, जो पिछले 12 वर्षों से ग्राम रक्षा समिति के सदस्य के रूप में पुलिस और प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, ने नाहरगढ़ थाने में लिखित आवेदन देकर अपनी आपबीती सुनाई है। अनिल ने बताया कि वे हर रविवार ग्राम रोजा फतेहगढ़ स्थित मेलडी माता मंदिर में दर्शन हेतु जाते हैं। इसी आस्था को हथियार बनाकर कथित पत्रकार ललित धाकड़ ने उनके खिलाफ साजिश रचनी शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पर फैलाया 'झूठ का रायता'
आरोप है कि ललित धाकड़ ने व्हाट्सएप ग्रुपों में एक भ्रामक मैसेज वायरल किया। इस मैसेज में मंदिर के साधु और अनिल के खिलाफ जहर उगलते हुए लिखा गया कि "साधु, एन.आर.एस. अनिल को बुलाकर ग्रामीणों को डराता-धमकाता है।" जब अनिल ने इस झूठे आरोप का विरोध किया और ललित से सबूत माँगे, तो कथित पत्रकार ने 'रिकॉर्डिंग' होने का खोखला दावा किया।
एसे में बड़ा सवाल यह भी है कि यदि ललित धाकड़ के पास कोई सबूत थे, तो उसने थाने में शिकायत क्यों नहीं की? क्या व्हाट्सएप पर कीचड़ उछालना ही उसका एकमात्र मकसद था?
5000 रुपये दो, नहीं तो 'बड़ी खबर' से कर दूँगा बदनाम!
विवाद तब और गहरा गया जब दो-तीन दिन पहले ललित ने अनिल को रास्ते में रोककर अपनी असली औकात दिखा दी। अनिल का आरोप है कि ललित ने उनसे 5000 रुपये की डिमांड की। उसने धमकी देते हुए कहा— "अगर पैसे नहीं दिए, तो मंदसौर और रतलाम के सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुम्हारे खिलाफ ऐसी खबर बनाऊँगा कि कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहोगे।"
मजदूर की मेहनत पर 'पीत पत्रकारिता' का डाका
पीड़ित अनिल एक साधारण मजदूर हैं जो मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। एक तरफ वे समाज सेवा के लिए ग्राम रक्षा समिति में स्वेच्छा से समय देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ललित धाकड़ जैसे लोग उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नीलाम करने की धमकी दे रहे हैं।
अब कार्रवाई की बारी
अनिल दमामी ने अब नाहरगढ़ पुलिस के सामने न्याय की गुहार लगाई है। क्षेत्र में चर्चा है कि ललित धाकड़ खुद को पत्रकार बताकर कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बना चुका है।
पत्रकारिता का काम समाज को आईना दिखाना है, किसी को डराकर जेब भरना नहीं। नाहरगढ़ पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि 'ब्लैकमेलिंग' की दुकान चलाने वाले ऐसे तत्वों को कड़ा सबक मिल सके।